छत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

730 बोरी अवैध धान की बड़ी खेप जब्त, प्रशासन सख्त

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बलरामपुर जिले में धान की अवैध तस्करी पर कड़ी निगरानी के तहत एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। बलरामपुर जिले के धनवार बॉर्डर स्थित अंतरराज्यीय चेक पोस्ट पर कृषि विभाग एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से छापा मारकर 730 बोरी अवैध धान से लदा एक ट्रक जब्त किया है। यह ट्रक उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ की ओर आ रहा था और चेकिंग के दौरान विभाग को इस अवैध खेप का पता चला।
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राज्य में 14 नवंबर से धान की खरीदी प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, और इसी को देखते हुए प्रशासन ने अवैध धान के परिवहन पर कड़ी निगरानी के आदेश जारी किए हैं। बलरामपुर जिले में अवैध धान के परिवहन के मामले में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में एक पिकअप ट्रक से अवैध धान की बड़ी खेप पकड़ी गई थी।
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प्रशासनिक सख्ती और कलेक्टर का आदेश,,

जिले के बलरामपुर कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि धान की खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी न होने पाए। बलरामपुर कलेक्टर ने यह भी सुनिश्चित करने की बात कही है कि धान की खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसान अपना हक पूरी तरह से प्राप्त कर सकें। अवैध धान परिवहन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आदेश भी जारी किया गया है ताकि बाहरी राज्यों से लाया गया धान स्थानीय किसानों की खरीद पर असर न डाले।

कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई धान की खरीदी के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए है। उन्होंने कहा कि बाहरी धान की बिक्री राज्य में प्रतिबंधित है और इसके लिए कड़ी चेकिंग की जा रही है।

सख्त निगरानी जारी,,

अधिकारियों का कहना है कि अवैध धान की तस्करी पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए जिले के सभी प्रमुख चेक पोस्टों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अंतरराज्यीय बॉर्डर चेक पोस्टों पर कृषि विभाग के साथ-साथ खाद्य विभाग के कर्मचारी भी चौबीसों घंटे तैनात रहेंगे।

धान की खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत से ठीक पहले पकड़ी गई यह खेप यह साबित करती है कि प्रशासन किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि के प्रति सख्त है। आने वाले दिनों में इस तरह की तस्करी पर पूरी तरह से रोक लगाने की कोशिश की जाएगी ताकि स्थानीय किसानों को उनके फसल का उचित मूल्य मिल सके और बाजार में किसी प्रकार की अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न न हो।

किसानों के हित में उठाए गए कदम,,

इस कार्रवाई को किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह की तस्करी से राज्य के किसानों को नुकसान होता है क्योंकि बाहरी धान बाजार में पहुंचने से स्थानीय धान की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। इस रोक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह से किसानों के अनुकूल हो और उन्हें उनके उत्पादन का पूरा लाभ मिल सके।

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