बलरामपुर कार्यक्रम में नाबालिक बच्चियों से कार्य : मंच से अधिकारियों की चुप्पी पर उठे सवाल
बालश्रम निषेध कानूनों के उल्लंघन के बीच छतीसगढ़ का स्थापना दिवस कार्यक्रम में पहुंचाया जा रहा है पानी

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 2024 के अवसर पर बलरामपुर जिला मुख्यालय में एक चौंकाने वाली घटना देखने को मिली, जहां नाबालिग बच्चियों से पानी सर्वे का काम करवाया गया। इस पूरे घटनाक्रम को वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारी मंच से देखते रहे, जो स्वयं इस प्रकार की बाल श्रम गतिविधियों के खिलाफ सख्त बयान देते आए हैं। यह घटना उन मानकों और नियमों का उल्लंघन प्रतीत होती है, जिन्हें राज्य और केंद्र सरकार ने बाल श्रम के खिलाफ सख्ती से लागू किया है। सुप्रीम कोर्ट के भी स्पष्ट निर्देश हैं कि नाबालिग बच्चों से श्रम कार्य नहीं करवाया जाना चाहिए।
यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जो अधिकारी होटल, रेस्टोरेंट और अन्य जगहों पर छापेमारी करते हैं ताकि नाबालिग बच्चे काम न करें, वही अधिकारी एक सार्वजनिक और सरकारी आयोजन में चुप कैसे रह सकते हैं? ऐसे आयोजनों में, जहां बाल श्रम निषेध कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन होना चाहिए, वहाँ नाबालिग बच्चियों से काम करवाने की घटना दर्शाती है कि निचले स्तर पर कानून का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है।
श्रम विभाग का कार्य ही ऐसे गतिविधियों पर नजर रखना है और बाल श्रम पर रोक लगाना है, लेकिन इस मामले में श्रम विभाग ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। यह सवाल उठता है कि क्या श्रम विभाग और जिला प्रशासन ने इस घटना पर जानबूझकर अनदेखी की, या फिर यह उनके द्वारा लापरवाही का मामला है?
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक तंत्र में कुछ खामियां हैं, जिनके चलते कानूनों का सही तरीके से पालन नहीं हो पा रहा है। बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा का जो दावा प्रशासन करता है, वह यहां कमजोर नजर आया। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस मामले की जांच हो और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही के लिए बुलाया जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।
इस घटना से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं:
बाल श्रम निषेध कानून का उल्लंघन: इस प्रकार के आयोजनों में बच्चों का काम करवाना सीधे-सीधे बाल श्रम निषेध अधिनियम का उल्लंघन है।
प्रशासनिक जवाबदेही: मंच पर बैठे अधिकारियों का इस घटना पर कोई हस्तक्षेप न करना उनके कार्य की गंभीरता पर सवाल उठाता है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अनदेखी: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग बच्चों से किसी प्रकार का काम नहीं करवाया जाना चाहिए। इस घटना में इसे नजरअंदाज किया गया।
श्रम विभाग की भूमिका: श्रम विभाग को बाल श्रम रोकने के लिए जवाबदेही सौंपी गई है, लेकिन इस कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति या लापरवाही पर सवाल उठते हैं।
इस घटना पर उचित जांच होनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक तंत्र में जिम्मेदारी और पारदर्शिता स्थापित हो सके और बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।