धान खरीदी अव्यवस्था के विरोध में किसानों का आंदोलन
जिला पंचायत सदस्य साधना संतोष यादव किसानों के साथ डटीं, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

सनावल/डिंडो (क्षेत्र क्रमांक–04)।
प्रदेश में धान खरीदी को लेकर सरकार चाहे जितने दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कामेश्वर नगर स्थित धान खरीदी केंद्र, जो कि प्रदेश के कृषि मंत्री एवं विधायक माननीय श्री रामविचार नेताम का गृह ग्राम केंद्र है, वहां भारी अव्यवस्थाओं के चलते 126 किसान धान विक्रय से वंचित रह गए। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

सनावल, कामेश्वर नगर एवं पीपरपान क्षेत्र के किसानों ने बताया कि समय पर टोकन जारी नहीं होना, एग्री स्टैक की तकनीकी समस्याएं और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि जिन किसानों ने अपने जनप्रतिनिधियों को यहां तक पहुँचाया, आज वही किसान अपने अधिकार के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। इस पूरे मामले में न तो विधायक और न ही कोई मंत्री किसानों के साथ खड़ा दिखाई दिया।
*किसानों की आवाज़ बनीं साधना संतोष यादव*
ऐसे कठिन समय में क्षेत्र क्रमांक 04 की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती साधना संतोष यादव किसानों के साथ मजबूती से खड़ी नजर आईं। किसानों ने बताया कि वे केवल एक फोन पर 24 घंटे किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहती हैं। यह कोई एक दिन का संघर्ष नहीं है—पिछले दो महीनों से वे लगातार धान खरीदी की अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज़ उठा रही हैं।
*कलेक्ट्रेट में आंदोलन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन*
आज जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट में आयोजित किसानों के आंदोलन में श्रीमती साधना संतोष यादव स्वयं उपस्थित रहीं और किसानों की ओर से कलेक्टर महोदय के नाम ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही तहसीलदार महोदय को भी ज्ञापन देकर शीघ्र समाधान की मांग की गई।
ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि दो दिनों के भीतर शेष किसानों की धान खरीदी नहीं की गई, तो किसान अपने धान के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने को विवश होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
*जनप्रतिनिधित्व पर बड़ा सवाल*
जब कृषि मंत्री के गृह ग्राम की यह स्थिति है, तो पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों की दशा का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि किसानों के हक़, सम्मान और न्याय के लिए है।
किसानों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अब समय आ गया है कि जनता ऐसे प्रतिनिधियों को चुने, जो केवल पद और सत्ता तक सीमित न रहें, बल्कि किसानों और मजदूरों की लड़ाई में हमेशा उनके साथ खड़े रहें।