छत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

फर्जी मंत्रालयीय मान्यता दिखाकर प्रेस कार्ड बांटने का आरोप, डिजिटल पोर्टल की गतिविधियों से मचा हड़कंप

सूरजपुर में कथित अवैध पत्रकार नियुक्तियाँ, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में डिजिटल मीडिया के नाम पर कथित रूप से फर्जी प्रेस कार्ड जारी कर पत्रकारों की नियुक्ति किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। इस संबंध में पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रिंसू पाण्डेय ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

शिकायत के अनुसार, उत्तर प्रदेश निवासी एक व्यक्ति द्वारा DD24NEWS, DD24NOW एवं Famous TV नाम से डिजिटल न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल संचालित किए जा रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में कथित रूप से लोगों को “पत्रकार”, “ब्यूरो चीफ” और “स्टेट हेड” जैसे पद देकर प्रेस कार्ड, माइक्रोफोन आईडी एवं पहचान पत्र वितरित किए जा रहे हैं।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन पहचान पत्रों पर स्पष्ट रूप से “सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त” अंकित किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह दावा भ्रामक, असत्य और नियमों के विपरीत है, जिससे आम जनता एवं प्रशासन को गुमराह किया जा सकता है।

IT Rules 2021 के उल्लंघन का मामला
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के Rule-18 के तहत प्रत्येक डिजिटल न्यूज़ प्रकाशक को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के समक्ष अनिवार्य रूप से पंजीकरण एवं विवरण प्रस्तुत करना होता है।

नियमों के अनुसार बिना पंजीकरण के—

पत्रकार नियुक्त करना,
प्रेस कार्ड जारी करना,
मंत्रालयीय मान्यता प्रदर्शित करना,
पूरी तरह अवैधानिक है। इसके बावजूद संबंधित डिजिटल पोर्टल द्वारा नियुक्तियाँ और प्रेस कार्ड वितरण किया जाना नियमों का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होता है।

सूरजपुर जिले में भी नियुक्तियाँ
शिकायत में बताया गया है कि सूरजपुर जिले में भी दो व्यक्तियों को कथित रूप से पद प्रदान किए गए हैं—
एक को जिला ब्यूरो चीफ तथा दूसरे को स्टेट हेड नियुक्त किया गया है।

इन नियुक्तियों की वैधता और पात्रता पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना किसी वैधानिक अनुमति या पंजीकरण के इस प्रकार की नियुक्तियाँ करना संदिग्ध है।

फर्जी प्रेस कार्ड से कानून-व्यवस्था पर खतरा
स्थानीय पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि फर्जी प्रेस कार्ड के जरिए कुछ लोग शासकीय कार्यालयों में अनधिकृत प्रवेश, दबाव या अवैध लाभ लेने की कोशिश कर सकते हैं। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, बल्कि पत्रकारिता की साख और विश्वसनीयता भी कमजोर पड़ती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में इसका दुरुपयोग बढ़ सकता है, जिससे आम नागरिकों का मीडिया पर भरोसा भी कम होगा।

कलेक्टर से क्या मांगी गई कार्रवाई
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में मांग की गई है कि—

संबंधित पोर्टल की MIB Rule-18 के अंतर्गत वैधानिक स्थिति की जांच की जाए
जारी किए गए Press Card, Mic ID एवं नियुक्तियों का सत्यापन कराया जाए
दोष सिद्ध होने पर IT Act, IT Rules 2021, भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं अन्य विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए
राज्य में फर्जी पत्रकारों एवं फर्जी प्रेस कार्ड पर रोक लगाने हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट फिलहाल मामला जांच के अधीन है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म की गतिविधियाँ वैधानिक हैं या नहीं। हालांकि इस घटना ने जिले में डिजिटल मीडिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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