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बलरामपुर ,जातिगत जनगणना को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने की मांग, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा पांच सूत्रीय ज्ञापन

IMG-20260922-WA0042-300x134 बलरामपुर ,जातिगत जनगणना को वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने की मांग, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा पांच सूत्रीय ज्ञापन

बलरामपुर। जातिगत जनगणना को वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रामाणिक तरीके से संपन्न कराने की मांग को लेकर जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम बलरामपुर कलेक्टर को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में जातियों और समुदायों की वास्तविक संख्या दर्ज करने के लिए वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने, जातियों के अलग-अलग प्रचलित नामों और वर्तनी के अंतर को ध्यान में रखते हुए मानकीकरण करने तथा आधुनिक तकनीकी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
संगठन ने ज्ञापन में कहा है कि जातिगत जनगणना में केवल जाति का नाम दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि एक ही जाति या समुदाय के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित नामों को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज न किया जाए। ऐसा होने पर किसी समुदाय की वास्तविक आबादी अलग-अलग आंकड़ों में बंट सकती है और इससे भविष्य में तैयार होने वाली सामाजिक एवं कल्याणकारी योजनाओं के आंकड़े प्रभावित हो सकते हैं।

जाति पूछना ही पर्याप्त नहीं, सही तरीके से गिनना भी जरूरी ,,,
जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार कुशवाहा ने कहा कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य देश की वास्तविक सामाजिक और जनसांख्यिकीय स्थिति को सामने लाना होना चाहिए। इसके लिए पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक मानकीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “जाति पूछना ही पर्याप्त नहीं, जाति को सही गिनना जरूरी है।” अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही समुदाय के अलग-अलग नाम, पर्यायवाची नाम अथवा वर्तनी प्रचलित होने की स्थिति में यदि उन्हें अलग-अलग दर्ज किया गया तो संबंधित समुदाय की वास्तविक संख्या कई हिस्सों में बंट सकती है। इसका सीधा असर भविष्य में तैयार होने वाली नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक आंकड़ों के विश्लेषण पर पड़ सकता है।
जनगणना पर्ची में ओबीसी की स्पष्ट श्रेणी की मांग…
पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से जनगणना पर्ची में ओबीसी की स्पष्ट और अलग पहचान वाली श्रेणी रखने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पिछड़े वर्ग से संबंधित आंकड़ों को स्पष्ट एवं व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने के लिए जनगणना प्रक्रिया में श्रेणियों को लेकर किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए। संगठन के अनुसार, ओबीसी समुदायों से संबंधित आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाने से भविष्य में सामाजिक, प्रशासनिक और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आंकड़ों का विश्लेषण अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक कोड बनाने की मांग..

ज्ञापन में प्रत्येक जाति और समुदाय के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक जाति कोड निर्धारित करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है। संगठन ने इसके पीछे तर्क दिया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही जाति को अलग-अलग नामों से पुकारे जाने की स्थिति में वैज्ञानिक कोड के माध्यम से उसकी मूल पहचान को एकीकृत रखा जा सकता है। पिछड़ा वर्ग कांग्रेस का कहना है कि जनगणना के दौरान नागरिक द्वारा बताए गए स्थानीय अथवा प्रचलित नाम को दर्ज किया जा सकता है, लेकिन उसके साथ मानकीकृत जातीय पहचान को एक वैज्ञानिक कोड से जोड़ा जाए। इससे आंकड़ों के संकलन के दौरान एक ही समुदाय की संख्या अलग-अलग नामों के कारण अलग-अलग हिस्सों में दर्ज होने की संभावना कम होगी।

राज्यवार प्रमाणित जाति सूची तैयार करने की मांग…

संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों के प्रमाणित अभिलेखों के आधार पर राज्यवार मानकीकृत जाति सूची तैयार करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि केवल नामों में समानता के आधार पर दो अलग-अलग समुदायों को स्वतः एक ही जाति नहीं माना जाना चाहिए। पिछड़ा वर्ग कांग्रेस के अनुसार, जातियों के मानकीकरण के लिए सरकारी रिकॉर्ड, सामाजिक पहचान और संबंधित विषय के विशेषज्ञों की राय को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे अलग-अलग समुदायों की पहचान को सुरक्षित रखते हुए जनगणना के आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

गणनाकर्ताओं के लिए खोज आधारित चयन प्रणाली लागू करने की मांग…
जातिगत जनगणना में तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग भी ज्ञापन में की गई है। संगठन ने गणनाकर्ताओं के लिए खोज आधारित चयन और सहायता प्रणाली तैयार करने का सुझाव दिया है। इस व्यवस्था के तहत जातियों के अलग-अलग नाम, पर्यायवाची नाम और वर्तनी के अंतर को वैज्ञानिक जाति कोड से जोड़ा जा सकेगा। गणनाकर्ता द्वारा जाति का नाम दर्ज करने के दौरान संबंधित मानकीकृत विकल्प सामने आने से नाम लिखने में होने वाली त्रुटियों को कम किया जा सकता है। संगठन ने यह भी मांग की है कि यदि कोई वास्तविक जाति या समुदाय तैयार सूची में शामिल नहीं है तो उसके लिए अलग से नाम दर्ज करने की व्यवस्था हो। इससे केवल सूची में नाम उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी समुदाय की पहचान छूटने की संभावना को कम किया जा सकेगा।
जातिगत जनगणना से पहले राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग…

ज्ञापन की पांचवीं प्रमुख मांग जातिगत जनगणना शुरू होने से पहले उच्चस्तरीय बहु-विषयक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की है। संगठन का कहना है कि जातिगत आंकड़ों के वैज्ञानिक संकलन के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श लिया जाना चाहिए। पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने समिति में सामाजिक विज्ञान, जनगणना, सांख्यिकी, प्रशासन और संबंधित विषयों के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की है। संगठन के अनुसार, विशेषज्ञ समिति जातियों के नामों के मानकीकरण, वर्गीकरण, तकनीकी व्यवस्था और आंकड़ों के संकलन की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार कर सकती है।

गलत आंकड़ों से गलत नीति बनने की जताई आशंका…
जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा है कि जातिगत जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की सामाजिक और कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में आंकड़ों के संकलन के दौरान होने वाली तकनीकी, वर्गीकरण अथवा पहचान संबंधी त्रुटियां वास्तविक सामाजिक स्थिति के आकलन को प्रभावित कर सकती हैं।संगठन ने विशेष रूप से ओबीसी, ईबीसी और विभिन्न कारीगर समुदायों के नामों में मौजूद क्षेत्रीय विविधताओं को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया है। संगठन का कहना है कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इन संभावित तकनीकी चुनौतियों का समाधान किया जाना जरूरी है।

कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन के दौरान ये लोग रहे मौजूद….
राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार कुशवाहा के साथ विनोद कुमार गुप्ता, राजीव गुप्ता और अंकुर कुमार गुप्ता मौजूद रहे। जिला पिछड़ा वर्ग कांग्रेस ने मांग की है कि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने से पहले जातियों के वैज्ञानिक मानकीकरण, स्पष्ट श्रेणी निर्धारण, विशिष्ट जाति कोड, प्रमाणित राज्यवार जाति सूची, तकनीकी चयन प्रणाली और विशेषज्ञ समिति जैसे बिंदुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। संगठन का कहना है कि इससे जातियों और समुदायों की गणना अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रामाणिक तरीके से करने में मदद मिल सकती है।

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