छत्तीसगढ़सरगुजा संभाग

विधायक के निर्देश के बाद भी विभाग मौन, अब ज्वाइंट डायरेक्टर बोले—प्रतिवेदन का परीक्षण कर होगी जांच

IMG-20260806-WA0035-300x179 विधायक के निर्देश के बाद भी विभाग मौन, अब ज्वाइंट डायरेक्टर बोले—प्रतिवेदन का परीक्षण कर होगी जांच

वाड्रफनगर। बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय भरूहीबांस के प्रधानपाठक मनोज गुप्ता पर महिला शिक्षिकाओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। महिला शिक्षिकाओं ने प्रधानपाठक पर अभद्र व्यवहार और उनकी गरिमा व निजता को प्रभावित करने वाली हरकतों के आरोप लगाए हैं। मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और क्षेत्रीय विधायक से किए जाने के बावजूद करीब पांच दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्तनपान कराते समय छिपकर देखने का गंभीर आरोप

शिकायत में एक महिला शिक्षिका ने प्रधानपाठक मनोज गुप्ता पर बच्चे को स्तनपान कराते समय छिपकर देखने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिक्षिका का कहना है कि इस कथित घटना से वह मानसिक रूप से आहत हुई और विद्यालय में काम करने के दौरान असहज महसूस कर रही है।

महिला शिक्षिकाओं का आरोप है कि इस तरह के व्यवहार के कारण विद्यालय में उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण को लेकर चिंता पैदा हो गई है।

मासिक धर्म के दौरान छुट्टी पर मेडिकल सर्टिफिकेट मांगने का आरोप

शिकायत में महिला शिक्षिकाओं ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मासिक धर्म के दौरान अवकाश लेने पर प्रधानपाठक द्वारा मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने की मांग की गई। शिक्षिकाओं ने इसे संवेदनहीन व्यवहार बताते हुए महिला कर्मचारियों की निजता और सम्मान से जुड़ा मामला बताया है।

DEO और विधायक तक पहुंची शिकायत

प्रधानपाठक के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर महिला शिक्षिकाओं ने जिला शिक्षा अधिकारी के साथ क्षेत्रीय विधायक को भी लिखित शिकायत दी थी। शिकायत सामने आने के बाद विधायक द्वारा अधिकारियों को मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई थी।

इसके बावजूद करीब पांच दिन बीतने के बाद भी कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आने से अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर मामले में कार्रवाई शुरू होने में देरी क्यों हो रही है।

विधायक के निर्देश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

महिला कर्मचारियों से जुड़े गंभीर आरोप होने के कारण शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हुई हैं। सवाल उठ रहा है कि जब मामला विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और विधायक तक पहुंच चुका था तो शिकायत पर तत्काल प्रारंभिक जांच क्यों नहीं हुई?

यदि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं तो जांच पूरी होने तक शिकायतकर्ता महिला शिक्षिकाओं को सुरक्षित और सहज कार्य वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए हैं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।

पांच दिन बाद सामने आया ज्वाइंट डायरेक्टर का बयान

लगातार उठ रहे सवालों के बीच संयुक्त संचालक शिक्षा राजेश सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है। प्रतिवेदन का परीक्षण किया जाएगा और नियमानुसार जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि शिकायत के करीब पांच दिन बाद भी मामला प्रतिवेदन के परीक्षण और जांच की प्रक्रिया तक पहुंचने से विभाग की कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

महिला शिक्षिकाओं की सुरक्षा और सम्मान का सवाल

यह मामला अब केवल प्रधानपाठक और शिक्षिकाओं के बीच के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। मामला कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की गरिमा, निजता और सुरक्षित वातावरण से जुड़ा होने के कारण निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जांच पूरी होने तक शिकायतकर्ता महिला शिक्षिकाओं को क्या उसी कार्य वातावरण में काम करना होगा या विभाग उनकी शिकायत को देखते हुए कोई अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था करेगा?

अब शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल संयुक्त संचालक ने प्रतिवेदन के परीक्षण के बाद नियमानुसार जांच और कार्रवाई की बात कही है। अब देखना होगा कि विभाग जांच कितनी तेजी से पूरी करता है और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

 

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