रघुनाथनगर के ग्राम कर्री में 19.76 हेक्टेयर शासकीय चरागाह भूमि पर कब्जे का आरोप, तहसीलदार के स्टे के बाद भी खेती की शिकायत
पटवारी रिपोर्ट तक प्रवेश, निर्माण और कृषि कार्य पर रोक; ग्रामीणों का आरोप—रात में ट्रैक्टर से हो रही जोताई, करीब 55 एकड़ सरकारी भूमि पर वर्षों से खेती का दावा

रघुनाथनगर/बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत कर्री में शासकीय चरागाह एवं ग्रामीण निस्तार की भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद तहसीलदार रघुनाथनगर ने 19.76 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी करते हुए पटवारी प्रतिवेदन प्राप्त होने तक भूमि पर प्रवेश, मकान निर्माण और कृषि कार्य पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने विवादित शासकीय भूमि पर रात के समय ट्रैक्टर से जोताई कर खेती जारी रखने का आरोप लगाया है।
तहसीलदार कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार ग्राम कर्री निवासी शंकरदयाल, पिता रामजियावन ने रोहणी प्रसाद सहित अन्य लोगों के विरुद्ध आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में ग्राम कर्री स्थित शासकीय मद की खसरा नंबर 3, 6, 7, 8, 16, 17, 12, 18, 19 एवं 20, कुल 10 प्लॉटों का कुल रकबा 19.76 हेक्टेयर बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार यह भूमि पशुओं के चरागाह और ग्रामीणों के निस्तार के उपयोग में आती है।
आवेदन में आरोप लगाया गया कि खसरा नंबर 12 के 0.77 हेक्टेयर में से करीब 0.10 हेक्टेयर भूमि पर पक्का मकान बनाकर अतिक्रमण किया जा रहा है, जबकि अन्य संबंधित खसरों की भूमि पर ट्रैक्टर से जोताई कर अनधिकृत कृषि कार्य शुरू किया गया है।
तहसीलदार ने लगाया स्टे, फिर भी जोताई का आरोप
मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद तहसीलदार न्यायालय ने प्रथम दृष्टया सुविधा का संतुलन आवेदक पक्ष में पाया। इसके बाद पटवारी का प्रतिवेदन प्राप्त होने तक उभय पक्षों को विवादित भूमि पर प्रवेश करने, मकान निर्माण करने और कृषि कार्य करने से रोकने का अंतरिम आदेश जारी किया गया। आदेश को तत्काल प्रभावशील किया गया है।
अब ग्रामीणों का आरोप है कि स्थगन आदेश जारी होने के बावजूद शासकीय भूमि पर कृषि कार्य पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक रात के समय ट्रैक्टर से भूमि की जोताई कर खेती की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्टे आदेश के बाद एक पक्ष ने कृषि कार्य रोक दिया, लेकिन दूसरी ओर कथित रूप से जोताई जारी है।
रोहणी प्रसाद पर करीब 55 एकड़ भूमि पर खेती का आरोप
ग्रामीणों ने रोहणी प्रसाद जायसवाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति के नाम करीब दो एकड़ भूमि का पट्टा है, जबकि कथित रूप से लगभग 55 एकड़ शासकीय भूमि पर वर्षों से धान और मक्का की खेती की जा रही है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शासकीय भूमि पर लगे हरे-भरे पेड़ों को काटकर धीरे-धीरे खेती का दायरा बढ़ाया गया। हालांकि ग्रामीणों के इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों, सीमांकन और मौके की जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
स्टे के बावजूद रात में ट्रैक्टर चलने का दावा, प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार का अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावशील होने के बावजूद रात के समय ट्रैक्टर से भूमि की जोताई की जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि विवादित भूमि पर प्रवेश और कृषि कार्य पर स्पष्ट रोक है तो मौके पर आदेश का पालन क्यों नहीं हो रहा?
ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग तत्काल मौके का निरीक्षण करे और यह जांच करे कि स्टे आदेश जारी होने के बाद किस-किस खसरे में कृषि गतिविधि हुई है। यदि आदेश का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
55 एकड़ में धान की खेती तो बिक्री किस रकबे पर? ग्रामीणों ने उठाया सवाल
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने धान खरीदी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित व्यक्ति के नाम करीब दो एकड़ भूमि का ही पट्टा है और आरोप के मुताबिक लगभग 55 एकड़ भूमि पर खेती की जा रही है, तो इतनी बड़ी मात्रा में पैदा होने वाले धान की बिक्री आखिर किस भूमि के रकबे के आधार पर होती है?
ग्रामीणों ने प्रशासन से संबंधित व्यक्ति के राजस्व रिकॉर्ड, किसान पंजीयन, दर्ज कृषि रकबे और धान खरीदी केंद्रों में की गई बिक्री का मिलान कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अब पटवारी रिपोर्ट पर टिकी निगाह
फिलहाल तहसीलदार का अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावशील है और पटवारी की रिपोर्ट का इंतजार है। ऐसे में 19.76 हेक्टेयर शासकीय चरागाह एवं निस्तार भूमि की वास्तविक स्थिति, कथित 55 एकड़ कब्जे का दावा और स्टे आदेश के बाद भी खेती किए जाने के ग्रामीणों के आरोप प्रशासनिक जांच का अहम विषय बन गए हैं।
अब देखना होगा कि राजस्व अमला मौके पर पहुंचकर स्थगन आदेश का पालन सुनिश्चित करता है या शासकीय भूमि पर कथित खेती का यह मामला यूं ही चलता रहता है।