करोड़ों की लागत से बना रिंग रोड हुआ बदहाल, ट्रकों की आवाजाही बंद, नगरवासी परेशान

वाड्रफनगर, बलरामपुर। नगर पंचायत वाड्रफनगर में भारी वाहनों की आवाजाही को नगर क्षेत्र से बाहर करने और सड़क दुर्घटनाओं की समस्या कम करने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित रिंग रोड निर्माण के कुछ ही समय बाद बदहाल हो गया है। सड़क की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि प्रशासन को बैरिकेडिंग लगाकर ट्रकों और अन्य भारी वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, लगभग सात वर्ष पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में वाड्रफनगर नगरवासियों को भारी वाहनों से होने वाली परेशानी और लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं से राहत दिलाने के लिए रिंग रोड परियोजना को मंजूरी दी गई थी। करोड़ों रुपये की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण कार्य लंबे समय तक धीमी गति से चलता रहा। निर्माण पूर्ण होने के बाद जब सड़क पर ट्रकों का आवागमन शुरू हुआ तो कुछ ही समय में सड़क कई स्थानों पर टूटने लगी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रारंभिक क्षति के बाद सड़क की मरम्मत भी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद सड़क की हालत लगातार बिगड़ती गई। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क उखड़ चुकी है, बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और मार्ग पूरी तरह जर्जर दिखाई दे रहा है। स्थिति को देखते हुए सड़क पर बैरिकेड और बांस-बल्लियां लगाकर वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है।
नगरवासियों का कहना है कि रिंग रोड बंद होने के कारण भारी वाहन फिर से नगर क्षेत्र से गुजरने लगे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है और लोगों को पहले जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सड़क निर्माण कार्य के दौरान संबंधित विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों की निगरानी में कार्य कराया गया था, फिर भी सड़क इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाना गंभीर लापरवाही की ओर संकेत करता है।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण कार्य का ठेका अंबिकापुर की एक निर्माण एजेंसी को दिया गया था तथा कार्य का क्रियान्वयन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराया गया। नगरवासियों ने सड़क निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा रिंग रोड की गुणवत्ता पूर्ण मरम्मत की मांग की है।
नगरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि सड़क कुछ ही महीनों में जवाब दे दे, तो यह निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।