जमीन विवाद की गवाही देना पड़ा महंगा, तहसील परिसर में मारपीट के बाद 9 लोग पहुंचे जेल, एकतरफा कार्रवाई का आरोप

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर तहसील में वर्षों पुराने जमीन विवाद की सुनवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब तहसील परिसर में दो पक्षों के बीच जमकर विवाद और मारपीट हो गई। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं दूसरी ओर गिरफ्तार किए गए लोगों के परिजनों और ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जो लोग केवल गवाही देने तहसील पहुंचे थे, उन्हें भी आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया, जबकि मारपीट और हथियार लेकर दौड़ाने वाले लोगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई।
जानकारी के अनुसार वाड्रफनगर तहसील में रशीद खान और कशमुद्दीन खान के बीच जमीन विवाद का मामला वर्षों से न्यायालय में लंबित है। इसी मामले की सुनवाई के लिए दोनों पक्ष तहसील कार्यालय पहुंचे हुए थे। सुनवाई के दौरान किसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद के दौरान कशमुद्दीन खान के पुत्र द्वारा कथित रूप से रशीद Khan के गले में हाथ डालकर धक्का-मुक्की की गई। बताया जा रहा है कि उस समय तहसीलदार और तहसील कार्यालय का स्टाफ भी मौके पर मौजूद था। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तहसील परिसर के भीतर विवाद और मारपीट की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है।
आरोप है कि तहसील परिसर के अंदर विवाद होने के बावजूद तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद दोनों पक्ष बाहर निकले, जहां मामला और बढ़ गया। बताया जा रहा है कि तहसील परिसर के बाहर कुछ लोग कार में लोहे की रॉड लेकर पहुंचे थे और मारपीट की तैयारी में थे। वायरल वीडियो में कथित रूप से कशमुद्दीन खान के पुत्र को लोहे की रॉड लेकर लोगों को दौड़ाते हुए देखा जा सकता है।
हालांकि आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि जिन लोगों के हाथ में लोहे की रॉड थी और जो मारपीट करते दिखाई दे रहे थे, उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके उलट रशीद खान पक्ष की ओर से गवाही देने पहुंचे लोगों को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया।
मामले को लेकर तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि तहसीलदार द्वारा अपने लेटर पैड पर पत्र तैयार कर चौकी प्रभारी वाड्रफनगर को कार्रवाई के लिए भेजा गया, जिसके आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि इनमें से कई लोग केवल गवाह के रूप में तहसील पहुंचे थे और उनका मारपीट से कोई लेना-देना नहीं था।
ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि यदि गवाही देने आए लोगों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई होगी, तो भविष्य में कोई भी व्यक्ति न्यायालय या तहसील में गवाही देने जाने से डरेगा। उनका कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया में गवाहों की अहम भूमिका होती है, लेकिन यदि निर्दोष लोगों को भी आरोपी बनाकर जेल भेजा जाएगा तो यह न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करेगा।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना जल्दबाजी में कार्रवाई कर दी। उनका कहना है कि वीडियो फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों के बयान की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके।
इधर इस पूरे मामले के बाद वाड्रफनगर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन विवाद पहले से ही संवेदनशील मामला था, लेकिन तहसील परिसर में इस तरह की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि तहसील और न्यायालय परिसर जैसी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था और विवाद नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।
फिलहाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है, जबकि कुछ अन्य लोग अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। मामले को लेकर दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
वहीं दूसरी ओर परिजन और ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच होनी चाहिए और यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को जेल भेजा गया है तो उसे न्याय मिलना चाहिए।
अब देखना होगा कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या विवादित कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सामने आता है या नहीं।