कलेक्टर के लेटरहेड पर आदेश जारी करना पड़ा भारी, डीईओ मनीराम यादव को संयुक्त संचालक का कारण बताओ नोटिस
मीडिया में खुलासे के बाद बढ़ी मुश्किलें, कलेक्टर की फटकार के बाद अब संभागीय स्तर से भी जवाब तलब

बलरामपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जिला कलेक्टर के लेटरहेड पर आदेश जारी किए जाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद पहले जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया और अब संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा, सरगुजा ने जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय, अंबिकापुर द्वारा 3 जून 2026 को जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा व्याख्याता राजेन्द्र कुमार देवांगन से संबंधित प्रकरण में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्यालय कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज के लेटरहेड पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। नोटिस में पूछा गया है कि कलेक्टर के लेटरहेड का उपयोग किस नियम अथवा सक्षम अधिकारी की अनुमति से किया गया।
नोटिस में इस कृत्य को पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और उदासीनता बताते हुए इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले का खुलासा मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से हुआ था। खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सफाई देते हुए इसे मात्र “लिपिकीय त्रुटि” बताया था। हालांकि विभाग की इस दलील ने विवाद को शांत करने के बजाय और अधिक सवाल खड़े कर दिए।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आदेश वास्तव में त्रुटिवश जारी हुए थे तो कई दिनों तक विभाग के किसी अधिकारी की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी? सरकारी कार्यालयों से जारी होने वाले आदेश कई स्तरों से गुजरते हैं। ऐसे में जिला कलेक्टर के लेटरहेड पर दो अलग-अलग आदेश जारी हो जाना और बाद में उसे लिपिकीय त्रुटि बताना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।

इस मामले में पत्रकारों द्वारा दूरभाष पर चर्चा किए जाने पर बलरामपुर-रामानुजगंज कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि जिला शिक्षा अधिकारी का पद अत्यंत जिम्मेदारी वाला होता है और उनके कार्यालय से प्रतिदिन 10 से 15 डाक निकलती हैं, जिन पर स्वयं डीईओ हस्ताक्षर करते हैं। ऐसे में संबंधित लेटरहेड पर उनकी नजर क्यों नहीं पड़ी, यह गंभीर विषय है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया था कि डीईओ को फटकार लगाई गई है तथा नोटिस भी जारी किया गया है।
इधर, विवादित आदेशों से प्रभावित कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विभाग ने आदेशों को त्रुटिपूर्ण तो बताया है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संबंधित कर्मचारियों के लिए संशोधित आदेश जारी किए जाएंगे या नहीं।
अब जबकि कलेक्टर की फटकार के बाद संभागीय संयुक्त संचालक स्तर से भी औपचारिक कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है, यह मामला केवल “लिपिकीय त्रुटि” तक सीमित नहीं रह गया है। प्रशासनिक जवाबदेही, सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता और अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर उठे सवालों के बीच सभी की नजरें अब डीईओ के जवाब और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।